Wednesday, September 8, 2021

कोलाहल

इन सूनी आँखों मे अब नींद कहाँ? जागा रातों जिसकी खातिर वो मनमीत कहाँ? स्याही रातों की अब मन को भाती है। डरने वाले नही हम और देखो भयभीत कहाँ? जाने क्यूँ लोग पहले किसी को अपनाते हैं? फिर ठुकरा देते हैं,शायद पहली सी प्रीत कहाँ? भाग रहे हैं सब जीवन के इस कोलाहल मे, इस दुनिया मे अब पहले सा संगीत कहाँ?

नज़रे इनायत

उस पार तुम्हारा घर-आँगन, इस पार हमारा चौबारा। बस इक बार झलक दिखला, जाने कब होगा दीदार दोबारा? चन्द्रमुखी सा रूप देखकर, हर कोई तुझ पर दिल हारा। जिस पर हो जाए नज़रे इनायत, हो जाएगी उसकी पौबारा।।

Wednesday, August 11, 2021

आरक्षण

आरक्षण किसी भी देश और समाज मे जातियों के आधार पर नहीं होता है,क्यूँ कि आरक्षण अयोग्य को भी आत्मसात कर योग्य अभ्यर्थियों मे विद्वेष पैदा करता है।समाज से योग्य प्रतिभाओं का पलायन शुरू हो जाताहै।अब 50%आरक्षण की भी माँग शुरू हो गई है।हिंदू धर्म मे ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र चार वर्ण है।यदि केवल शूद्रों को ही 50%आरक्षण उपलब्ध हो गया तो बाकी 3 वर्णों मे विद्वेष,पलायन के साथ ही भारतीय संस्कृति और संविधान पर से विश्वास उठने लगेगा। 50 वर्ष का आरक्षण संविधान निर्माताओं ने इसीलिये स्वीकृत किया था ताकि एससी/एसटी का पिछडे से समाज की मुख्य धारा मे जुडकर अपनी सहभागिता समझैं,पर इतिहास साक्षी है कि ऐसा 75 वर्ष के आरक्षण के बाद भी नही हुआ। समाज मे कोई एसी विषम परिवर्तन नही करना चाहिए कि 3/4 वर्ण समाज आक्रोषित हो सडकों पर उतरकर अपने लिए संघर्ष करने लगे।"सत्ता समाज मे जिसकी जितनी भागीदारी, उसकी उतनी हिस्सेदारी"का अर्थ आर्थिक रुप से विपन्नता को समाप्त कर संविधान की आत्मा को जागृत रखें।